महत्वपूर्ण मुकाम

 
वर्ष घटना या शस्त्र जो स्थापित हूएं
1901 भारतवर्ष में लघुशस्त्रों के वृहदस्तर पर उत्पादन और मशीनगानों की ओवरहालिंग एवं मरम्मत के लिये राइफल फ़ैक्टरी की स्थापना का प्रस्ताव रखा जाता।
1903 पुरानी गन पाउडर फ़ैक्टरी के स्थान पर वर्तमान फ़ैक्टरी के निर्माण का आरंभ्।
1904 26 सितम्बर, 1904 को फ़ैक्टरी की स्थापना।
1905 'राइपफल' फ़ैक्टरी ईशापुर' के नाम से नई फ़ैक्टरी द्वारा कार्य आरंभ्।
1907 सितम्बर 1907 में पहली राइफल-303" बोहर सेकशन राइफल प्रतिष्ठित की गई।
1908 मार्च 1908 से राइफलों के खेप में उत्पाद्न का आरंभ्।
1917 अखरोट की लकड़ी (स्टॉक हेतु) के एवज में स्थानीय तैर व्यवस्था दिया जाना, जिसे पहले वन अनुसन्धान विभाग के माध्यम से आयात किया जाता था।
1918-19 प्रथम विश्वयुद्ध के अन्तिम वर्ष में फ़ैक्टरी ने एस एम एल ई प्रकार की 36,037 राइफलों का उत्पादन किया और अन्य के अलावा 22,636 राइफलों का एम के VII अम्युनिशन के योग्य परिवर्तित किया। इस समय फ़ैक्टरी में 102 स्टाफ एवं 4,109 कामगार कार्यरत थे।
1920 आयुध निर्माणीयों के भारतीयकरण की दिशा में पहला कदम उठाया गया और राइफल फ़ैक्टरी में अप्रेन्टिस को प्रशिक्षित करने की योजना आरंभ की गई।
राइफल फ़ैक्टरी कोआपरेटिव सोसाइटी की स्थापना हुई।
1921 प्राथमिक संस्थान के रूप में राइफल फ़ैक्टरी हाईस्कुल की स्थापना की गई।
1923 वाइकर, 303 एम के I  मशीनगण के मरम्मत कार्य का आरंभ्।
1925 सरकार द्वारा मशीनगनों का मरम्मत कार्य आरंभ करने और इस प्रकार की मरम्मत के लिये सामान्यत: लगने वाले पुर्जों के उत्पादन हेतु विस्तार योजना को मन्जुरी।
1927 स्टेर्टवेन्ट किल्न सीजनींग प्लांट कीन स्थापना।
1928 औपचारिक तौर पर दिनांक 04/01/28 से 'आर्डनेन्स ट्रेनिगं स्कूल' की स्थापना।
1929 'भारतीय आर्डनेन्स स्टाफ क्लब' भवन की शापना।
1930 हिन्दु और मुस्लिम भारतीयों के लिये अलग-अलग भोजन कक्ष का निर्माण।
1932 कैन्टीन की स्थापना।
1933 लाइट अटोमेटिक वाइकर बेर्टियर मशीनगन्, 303" के उत्पादन हेतु गेज एवं टुलों के निर्माण का आरंभ्।
1935 पायनियर वी बी गन का स्वीकृति क्षमता परीक्षण किया गया और उच्चतम ब्रिटिश मानक के अनुरुप पाया गया।
1937 वी बी गन की प्रथम 200 संख्या का उत्पादन कार्य पुरा किया गया।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान फ़ैक्टरी ने पाँच लाख राइफलों का उत्पादन किया।
1943-44 आर एफ आई कैन्टीन में चाय एवं नाश्ता शाखा आरंभ की गई।
1953 12 बोर डी बी बी एल एवं एस बी बी एल शॉट गनों का उत्पादन आरंभ किया गया।
1954 स्वर्ण जयंती समारोह मनाया गया।
1956 .315" स्पोर्टिंग राइफल प्रतिष्ठित हुई(बाजार में इस शस्त्र की अब भी बहुत मांग है।
1960 7.62 एम एम 1ए1 ईशापुर राइफल प्रतिष्ठित हुई।
वर्ष 1962 के लिये राइफल फैक्टरी कोआपरेटिव सोसाइटी को "सर्वोत्तम उपभोक्ता कोआपरेटिव" घोषित कर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 'डॉ बी सी रॉय मेमोरियल शील्ड' प्रदान की गई।
1963 7.62 एमएम ईशापुर राइफल का खेपों उत्पादन सफलतापूर्वक दिसम्बर में स्थापित हुआ।
1964 हीरक जयन्ती समारोह मनाया गया
1967 श्री के सी बनर्जी, महाप्रबंधक/राइफल फैक्टरी को "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया।
1970 .50" रेंजिंग गन प्रतिष्ठित की गई।
1971-72 आटोमेटिक 9एमएम 1ए पिस्टल के उत्पादन के लिये आरंभिक कार्य हाथ में लिया गया।
1979 लांचर रॉकेट (84 एम एम रॉकेट लांचर) के नए रूपान्तर का उत्पादन कर आपूर्ति आरंभ कर दी गई।
1981 9 एम एम पिस्टल का बहुसंखा में उत्पादन आरंभ हुआ।
1983-84 5.56 एम एम इन्सास राइफल के उत्पादन के लिए आरंभिक काम किया गया।
1990-91 Project sanctioned for manufacture Rifle 5.56 mm INSAS.
Newly developed rifle 5.56mm INSAS was handed over to the representative of lndian Army by the Chairman, Ordnance Factory Board at a ceremonial function on 4.1.1991.
1994 5.56 एम एम इन्सास राइफल का बहुसंखा में उत्पादन आरंभ हुआ।
दिनांक 4/4/1994 को आयोजित एक समारोह में सेना को
5.56 एम एम इन्सास राइफल की पहली खेप सौंपी गई।
1995 राइफल फैक्टरी इशापुर को सी आई आई द्वारा पूर्व क्षेत्र के 'तीसरे श्रेष्ठतम उत्पादकता पुरस्कार' से नवाजा गया।
1995-96 राइफल फैक्टरी को आई एस ओ 9002 प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ।
1997 प्रधानमंत्री द्वारा "टेक्नोलॉजी स्थानान्तरण एवं आत्मसातीकरण" पुरस्कार से नवाजा जाना।
.22 स्पोर्टिंग राइफल प्रतिष्ठित हुई।
2001 राइफल फैक्टरी कोआपरेटिव सोसाइटी को पशिम बंगाल के 'सर्वश्रेष्ठ कोआपरेटिव पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
2002 .22 रिवाल्बर प्रतिष्ठित हुई।
आई एस ओ/ आई ई सी 17025 के अनुसार रासायनिक परीक्षण प्रोयोगशाला के लिये एन ए बी एल मान्यताप्राप्त हुई।
क्यु एम एस का आई एस आई आई एस ओ 9001:2000 में उच्च श्रेणीकरण।
2003 .22 अष्टभेदी रिवाल्बर प्रतिष्ठित हुइ।
राष्ट्रीय संरक्षा पुरस्कार प्राप्त हुआ।
Won National Safety Awards
2004 शताब्दी समारोह्